शारदा मोंगा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शारदा मोंगा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

यामा बीत गई 06

उठ जाग रे, यामा बीत गयी,
सदियों का कोहरा छटा,
आशा का हुआ प्रभात,
गा नव प्रभात का गान,
कि यामा बीत गयी.

नभ-वातायन से अंशुमान
ने झांक, दिया सन्देश-
तारागण गये किस देश,
अब रहा न कोहरा शेष,
कि यामा बीत गयी,

खुशियों का हुआ उदय,
कर नव प्रभात का स्वागत
गा राग रागिनी,
छेड़ भैरवी तार,
व मालकोंश की तान,
कि यामा बीत गयी

सपनों को अब छोड़,
नयन तू खोल,
बादलों की रजत-सुनहरी
शैय्या का कर त्याग
उठ, कर निर्माण की बात
खग कुल कुल करें शुभ गान,
कि यामा बीत गयी .

उठ जाग रे, यामा बीत गयी,

शारदा मोंगा
ऑकलैंड

सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

ताजा समाचार यह भाई 15

ताज़ा समाचार यह भाई,
प्रकृति आज जिद पर आई,

समुद्र देवता भये क्रुद्ध,
प्रकृति हुई ऐसी विरुद्ध,
भूचाल के लगे झटके,
फूं फूं शेषनाग सर पटके,
सुनामी महाकाली आई--
ताज़ा समाचार यह भाई,

भूमि थर थर रही कांपने,
कुपित समुद्र लगा हांफने,
परमाणु दानव ने हुंकारा
लगा सुनामी का फुंकारा
हजारों मानव चट कर गई
ताज़ा समाचार यह भाई,

सुनो समाचार घोटालों का,
स्वदेश को बेचने वालों का,
कलमाड़ी, हसन, ए.राजा,
देशको लूट के ही खा जा,
राजनीति पैसा हजम कर गई
ताज़ा समाचार यह भाई,

'ओनर किल्लिंग' की परम्परा,
बनी समाचारों की संपदा,
नहीं सुरक्षित सडक पर नारी,
महिलाओं को स्वतंत्रता भारी,
बाहर जायें तो मौत है आई,
ताज़ा समाचार यह भाई...

-शारदा मोंगा
(ऑकलैंड, न्यूजीलैंड)

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

ओ बदरा रे, मेघा रे : शारदा मोंगा 10

बन-बन, डार-डार, मेघा रे
ओ बदरा रे, मेघा रे

उमड़-घुमड़कर बदरा बरसे
बिजुरी चमके, दामिनी दरसे
दादुर, मोर, पपीहा बोले
मनवा डोले होले-होले
गड़-गड़ गरजे, रिमझिम बरसे
इन्द्रधनुष सतरंगी रे
ओ बदरा रे, मेघा रे

कारी घटा घन फिर उमड़ावत
पपीहा बोले मन घबरावत
लरज-लरज बदरिया बरसे
हिय में सुधि प्रियतम की सरसे
मेघ, मल्हार, बजे बंसुरिया
राधा सँग नाचे साँवरिया
ओ बदरा रे, मेघा रे
--
शारदा मोंगा

मुकुलित कुमुद मृणालिनी : शारदा मोंगा 09

सखि प्राणप्रिये हे सुंदरी
मम हृदय कुञ्ज निवासिनी

मृदु मंद गंधित कमलनयनी
सौरभ सुखद सुहासिनी
नवनील नीरज नीरजा
अरविन्द पुष्ट उरोजिनी
मुकुलित कुमुद मृणालिनी
मम हृदय कुञ्ज निवासिनी

मुखारविंद, कर, पद्म चरण
कंज लोचन कंजारुणं
प्रमुदित अरविन्द लोचना
विहंसित स्मिता सुलोचना
लोल ललित हे पद्मिनी
मम हृदय कुञ्ज निवासिनी

तव प्रेम चाह की प्रतीक्षा
मम हृदये कुरु अमृतवर्षा
मृदु कोमल सुमधुर भाषिणी
मम हृदय कुंज निवास कुरु
छविनील सुनील सरोजिनी

सखि प्राणप्रिये हे सुन्दरी
मम हृदय कुञ्ज निवासिनी
--
शारदा मोंगा

शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

आतंक ने है घेरा : शारदा मोंगा 'एरोमा' 08

है समय का फेरा,
आतंक ने है घेरा।

चोरी धमार, है बेशुमार,
दुराचार और अत्याचार,
असहाय जनता है लाचार,
छल कपट का डेरा।

सिलसिला बम्ब धमाकों का,
अपहरण और विस्फोटों का,
खून के प्यासे, बहशी दरिंदे ,
स्वार्थी दुश्मन, विषैले फंदे ,
आतंकी साया चहुँ ओर छाया,
लगाया खौफ ने डेरा।

उठ जाग युवक, रणभेरी बजा,
कर दृढ़ संकल्प , पकड़ खडग,
वीरों का कर्तव्य यही ,
पहन क्रान्ति का चोला,
आतंक हो समूल नष्ट,
मिटे आतंकी घेरा।
--
शारदा मोंगा 'एरोमा'

मधुबसंत की खिली यामिनी : शारदा मोंगा 07

मधुबसंत की खिली यामिनी
चुपके चुपके आ जाना
बासंती संसार बना है
तन मन पर तुम छा जाना
मेरे मन के वृन्दावन में
मुरली मधुर बजा जाना

कोकिल पंचम तान सुनाये
ऊंचे स्वर में विरहा गाए
यह कैसी अलसित मधुरिमा
तन मन पर ऐसी है छाये
मधुबसंत की बन चन्द्रिका
पिय मिलन की आस जगाये

नव नभ में छिटकी चन्द्रिका
लिए पलाश की नवल रक्तिमा
उपवन उपवन फूल पुष्पिका
हो सुवासित मधुर मधुरिमा
मेरे तन मन के मंदिर में
मधुर मधुर मुस्का जाना

यह कैसी अलसित मधुरिमा
तन मन पर ऐसी छाई
मेरे प्राण मंदिर में जैसे
बजे प्यार की शहनाई
मधुबसंत की बन चन्द्रिका
चुपके से तुम आ जाना

कलिके मधुघट से तुहिनकण
मधु पी भ्रमर मदमत्त हुआ
तुम भी प्रेम प्याला ला संग
कमल हस्त से पिला देना
मधु बसंत की खिली यामिनी
चुपके चुपके आ जाना

--
शारदा मोंगा